यूपी चुनाव से पहले सत्ता का सेमीफाइनल, राज्यसभा की 10 सीटों पर सपा-बीजेपी के बीच सीधा मुकाबला, मैदान से बाहर हुई बसपा
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UP Rajya Sabha Elections 2026: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (UP Chunav 2027) होने से पहले सत्ता का सेमीफाइनल नवंबर में तब होगा जब राज्य की 10 राज्यसभा सीटों पर चुनाव होने वाला है.
जिसको लेकर सभी पार्टियों ने अपनी गोलाबंदी शुरू कर दी है.
समाजवादी पार्टी को इस राज्यसभा चुनाव में 2 और बीजेपी को 8 सीटें मिलने की संभावना है.
मौजूदा हालत को देखे तो खाली हो रही 10 सीटों में से 9 पर बीजेपी और 1 पर समाजवादी पार्टी का कब्जा है. 2017 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों के हिसाब से बीजेपी ने 9 सीटें जीती थीं, लेकिन इस बार विधायकों की संख्या बल के हिसाब से गणित बदल चुका है.
संख्या बल के आधार पर देखें तो बीजेपी इस बार आसानी से 8 सीटों पर जीत हासिल कर सकती है. वहीं समाजवादी पार्टी 2 सीटों पर जीत हासिल कर सकती है.
वहीं उत्तर प्रदेश की तीसरी प्रमुख पार्टी बहुजन समाज पार्टी की बात करें तो उसे एक भी सीट नहीं मिलने की संभावना है.
क्योंकि बसपा के पास एक भी विधायक नहीं बचा है. 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा के एक मात्र विधायक उमाशंकर सिंह चुने गए थे. जिनका निधन हो गया है. समाजवादी का क्या रोडमैप है? समाजवादी पार्टी के पास 2 सीटें आ रही हैं.
पहली सीट पर पार्टी के प्रमुख राष्ट्रीय महासचिव और अखिलेश यादव के चाचा रामगोपाल यादव की वापसी तय मानी जा रही है. लेकिन असली चर्चा दूसरी सीट को लेकर है.
इस सीट को लेकर सपा काफी मंथन कर रही है. 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इस सीट के माध्यम से सपा प्रमुख अखिलेश यादव बड़ा संदेश दे सकते हैं. जिसके लिए कई समीकरणों पर मंथन की जा रही है.
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समधी के संन्यास के बाद भतीजे को भी BSP से निकाला क्या राम आश्रय कुशवाहा को राज्यसभा भेजेंगे अखिलेश? 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए अखिलेश यादव फूंक-फूंककर कदम रख सकते हैं.
इस एक सीट को लेकर समाजवादी पार्टी पर बड़ा दबाव है. उनपर पीडीए समीकरण को भी ध्यान में रखना होगा. इस बीच एक नेता का नाम सबसे आगे चल रहा है. वो नाम राम आश्रय कुशवाहा का है.
जो विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर समाजवादी पार्टी में शामिल हुए हैं. राम आश्रय कुशवाहा 2013 से पहले सपा सरकार में मंत्री रह चुके हैं. बाद में वे बीजेपी में चल गए थे. अब फिर से उनकी घर वापसी हुई है.
बीजेपी छोड़ने के बाद कुशवाहा ने कहा कि उन्हें वहां वह सम्मान नहीं मिला जो मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के नेतृत्व में मिलता था.
कानपुर और आसपास के इलाकों में कुशवाहा वोटबैंक पर राम आश्रय का अच्छा खासा प्रभाव माना जाता है. उनके आने से सपा को गैर-यादव ओबीसी वर्ग को साधने में मदद मिल सकती है.
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📡 स्रोत: NewsData.io