यूपी में 2 दिन बाद फिर मानसून एक्टिव होगा:सीतापुर में पुल डूबे, सड़कें जलमग्न; महोबा में 6 डैम ओवरफ्लो
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →यूपी में लगातार हुई मानसूनी बारिश से नदियां उफान पर हैं। लखनऊ से सटे सीतापुर में छोटे पुलों के ऊपर से स्थानीय नदियों का पानी बह रहा है। सड़कें डूब गई हैं। कई बीघा फसलें जलमग्न हो गई हैं। ग्रामीण ट्रैक्टरों के सहारे आवाजाही करने को मजबूर हैं। महोबा में रिकॉर्ड बारिश के बाद यूपी-एमपी सीमा पर बने लहचूरा बांध समेत सभी 6 डैम ओवरफ्लो हो गए हैं।
ललितपुर में गोविंद सागर बांध के 4 गेट खोलकर पानी छोड़ा जा रहा है। उधर, गोंडा में घाघरा नदी के कटान से 4 गांव अब भी प्रभावित हैं। प्रदेश में एक बार फिर बारिश का दौर तेज होने के आसार हैं। बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के आसपास बने नए मौसमी सिस्टम ने प्रदेश के मौसम का मिजाज बदल दिया है।
सिस्टम के आगे बढ़ने के साथ यूपी में बंगाल की खाड़ी से नमी पहुंचेगी। इससे 23 से 25 सितंबर के बीच कई हिस्सों में बारिश शुरू होने और 24 से 26 सितंबर के बीच बारिश तेज होगी। बारिश-बाढ़ की तस्वीरें देखिए...
पश्चिमी राजस्थान के रास्ते मानसून की वापसी शुरू लखनऊ के मौसम वैज्ञानिक अतुल सिंह ने बताया- पश्चिमी राजस्थान से मानसून वापस जाना शुरू हो चुका है। इस वजह से यूपी में कई जगह हल्की-फुल्की बारिश हो रही है। फिलहाल अंडमान सागर और बंगाल की खाड़ी में एक नया सिस्टम बन गया है। यह आगे चलकर मजबूत होगा और ओडिशा-आंध्र प्रदेश की तरफ बढ़ेगा।
इससे वापस लौटता मानसून 23 से 25 सितंबर के बीच पूरे यूपी में फिर से बरसेगा। खुले स्थानों पर रहने वाले लोग सावधान रहें मौसम वैज्ञानिक के अनुसार, 24, 25 और 26 सितंबर को प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का प्रभाव अधिक रह सकता है। कई जगह गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। कुछ स्थानों पर तेज हवाएं चलने और आकाशीय बिजली चमकने की स्थिति भी बन सकती है।
ऐसे में खुले स्थानों पर रहने वाले लोगों को मौसम में अचानक बदलाव के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। पूर्वांचल में 25-26 सितंबर को अच्छी बारिश पूर्वी उत्तर प्रदेश में बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी का असर ज्यादा रहने की संभावना है। वाराणसी, गाजीपुर, जौनपुर और चंदौली समेत आसपास के जिलों में 25 और 26 सितंबर को कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है।
26 सितंबर को पूर्वी यूपी के कुछ हिस्सों में भारी बारिश के भी आसार हैं। महोबा में रिकॉर्ड बारिश से 6 बांध लबालब, कोटे ने 70% ज्यादा बरसात अल-नीनो का गेहूं, चना और सरसों की बुआई पर असर अल-नीनो का सबसे बड़ा असर रबी की फसलों पर पड़ने की आशंका है। विशेषज्ञ के मुताबिक, सबसे पहले गेहूं, चना और सरसों जैसी फसलों की बुआई पर असर पड़ सकता है।
अगर सितंबर के आखिर में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो खेतों में नमी कम रह जाएगी। इससे खासकर बुंदेलखंड में रबी की समय पर बुआई मुश्किल हो सकती है। इसके बाद फसल के बढ़ने के समय अगर पर्याप्त ठंड नहीं पड़ी और फरवरी-मार्च में गर्मी जल्दी बढ़ गई, तो फसल को दोहरा नुकसान हो सकता है। गेहूं में दाना भरने के समय तापमान ज्यादा बढ़ने से उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका रहेगी।
अल-नीनो के देर से मजबूत होने का फायदा नहीं, बल्कि नुकसान की आशंका ज्यादा है। मानसून अगर थोड़ा जल्दी लौटता है, सितंबर के आखिरी दिनों में बारिश कम रहती है, सर्दियों में न्यूनतम तापमान बढ़ा रहता है और मार्च में गर्मी जल्दी बढ़ती है, तो इसका असर फसलों की बुआई पर पड़ना तय है। सर्दियों पर असर- शीतलहर के दिन कम रह सकते हैं सर्दियों पर असर- शीतलहर के दिन कम रह सकते हैंअल-नीनो के असर से यूपी में सामान्य से ज्यादा तापमान रह सकता है।
इससे सर्दियों पर 2 तरह से असर दिख सकता है। पहला- शीतलहर वाले दिनों में कमी आ सकती है। सर्दियों में सामान्य शीतलहर 8 से 10 दिन की होती है। जो 2 से 3 दिन के अलग-अलग चरणों में आती है। इस बार ये 4 से 6 दिन तक सीमित रह सकती है। दूसरा- तापमान में गिरावट पिछले साल के बराबर नहीं होगी। उदाहरण के लिए 2025 की सर्दियों में मेरठ, कानपुर, आगरा, अयोध्या, बरेली का तापमान अलग-अलग तारीखों पर 2 से 3 डिग्री तक पहुंच गया था।
इस बार तापमान इतना नीचे आने की उम्मीद कम जताई जा रही है। हालांकि इसका कोहरे से कोई संबंध नहीं होगा। क्योंकि कोहरा स्थानीय वायुमंडल में नमी और हवा की स्पीड से बनता है। यूपी में बारिश-बाढ़ के अपडेट के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए...
📡 स्रोत: NewsData.io