यूपी के लखनऊ में अनकही कहानियों का नाट्य मंचन!
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वीओ - पीएम मोदी के सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन के 25 साल के सफऱ को लेकर... 'सेवा संकल्प अभियान - 2026' के तहत 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक एक महीने का देशव्यापी अभियान चलाया जा रहा है... जिसका मकसद पीएम मोदी के 25 सालों के सार्वजनिक सेवा काल और जनकल्याणकारी कार्यों को आम लोगों तक पहुँचाना है... इसी के तहत शुक्रवार को राजधानी लखनऊ के लोक भवन सभागार में 'सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत आयोजित... 'नमो सेवा: अनकही कहानियां' कार्यक्रम में सीएम योगी ने 7 अक्टूबर को बनने जा रहे खास रिकॉर्ड का जिक्र किया है...
बाइट – योगी आदित्यनाथ, CM, यूपी -
वीओ – राजधानी लखनऊ में आयोजित 'सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत 'नमो सेवा: अनकही कहानियां' कार्यक्रम में... पीएम मोदी के सार्वजनिक जीवन, सेवा और संघर्ष से जुड़ी कहानियों को नाट्य एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिये पेश किया गया... जहां सीएम योगी ने पीएम मोदी के कार्यकाल में आए तमाम बदलावों का जिक्र किया...
बाइट – योगी आदित्यनाथ, CM, यूपी -
वीओ - 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत आयोजित 'नमो सेवा: अनकही कहानियां' कार्यक्रम सिर्फ राजधानी लखनऊ तक सीमित नहीं है... बल्कि इस अभियान के तहत यूपी की सभी विधानसभा सीटों और प्रमुख स्थानों पर नुक्कड़ नाटकों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है... जिसमें पीएम मोदी के जीवन, उनके कड़े संघर्षों, सेवा कार्यों, सुशासन और देश के गुमनाम नायकों की अनकही कहानियों को जनता के सामने प्रदर्शित किया जा रहा है।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
लखनऊ के लोक भवन सभागार में ‘सेवा संकल्प अभियान-2026’ के अंतर्गत प्रधानमंत्री मोदी के 25 वर्ष के सार्वजनिक सेवा के सफ़र को नाटकीय रूप में प्रस्तुत किया गया। यह कार्यक्रम ‘सेवा संकल्प अभियान’ के एक महीने के देशव्यापी अभियान का हिस्सा है, जो 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक चल रहा है। यह पहल लोगों को मोदी सरकार की प्रमुख योजनाओं और कार्यों से परिचित कराती है, जिससे उनके कार्यों की पारदर्शिता और प्रभावशीलता का अनुभव हो सके। आम जनता के लिए यह प्रेरणा का स्रोत बन सकता है, जिससे नागरिक भागीदारी बढ़ेगी औ
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
इस अभियान से हमें यह सीख मिलती है कि सार्वजनिक सेवा के प्रति समर्पण को समाज में सकारात्मक ऊर्जा के रूप में देखा जाना चाहिए। जब किसी को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना करना पड़े, तो संवाद, कानूनी सहायता और सहानुभूति से समाधान खोजें। संघर्षों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने से समाज में विश्वास और एकजुटता बढ़ती है। यही वह मार्ग है जहाँ हर व्यक्ति अपने अधिकारों के साथ-साथ समाज के कल्याण के लिए योगदान दे सके।