यूपी के लखनऊ में विश्व सेप्सिस दिवस पर जागरूकता, KGMU में 12-13 सितंबर को सेप्सिस कॉन्फ्रेंस
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विश्व सेप्सिस दिवस के अवसर पर किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) के पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग ने सेप्सिस के प्रति जागरूकता बढ़ाने और समय पर उपचार की जरूरत पर जोर दिया। विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) वेद प्रकाश ने बताया कि सेप्सिस एक गंभीर और जानलेवा स्थिति है, जिसमें हर मिनट महत्वपूर्ण होता है।
संक्रमण के प्रति शरीर की अत्यधिक प्रतिक्रिया से सेप्सिस तेजी से अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है और गंभीर मामलों में सेप्टिक शॉक की स्थिति बन सकती है। विशेषज्ञों ने बुखार या शरीर का तापमान कम होना, हृदय गति बढ़ना, तेज सांस चलना, मानसिक स्थिति में बदलाव, निम्न रक्तचाप और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करने की सलाह दी।
साथ ही, एंटीबायोटिक के अंधाधुंध इस्तेमाल से बढ़ रहे एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) पर भी चिंता जताई गई। विशेषज्ञों के अनुसार सही एंटीबायोटिक, सही खुराक और सही समय पर उपचार से मरीज की जान बचाई जा सकती है। विश्व सेप्सिस दिवस 2026 की थीम ‘सेप्सिस में निवेश करें, जान बचाएं’ है। KGMU में 12 और 13 सितंबर को सेप्सिस प्रबंधन पर दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी, जिसमें विशेषज्ञ सेप्सिस की पहचान, उपचार और बेहतर प्रबंधन पर चर्चा करेंगे।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
सेप्सिस एक गंभीर संक्रमण से उत्पन्न होने वाली शरीर की अत्यधिक सूजन है, जो जल्दी न उपचारित रहने पर अंगों को नुकसान पहुँचा सकती है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि विश्व सेप्सिस दिवस पर जागरूकता बढ़ाने के लिए किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय ने 12-13 सितंबर को विशेष कॉन्फ्रेंस आयोजित की, जिससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को नवीनतम उपचार पद्धतियों पर चर्चा करने का मंच मिला। आम जनता के लिए इसका असर गहरा है: समय पर पहचान और उपचार से मृत्यु दर घट सकती है, और लोगों को संक्रमण के लक्षणों पर सतर्क रहने