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यूपीः रामपुर के नवाबी ‘हब्शी हलवे’ को ओडीओसी से नई पहचान, यूपीआईटीएस में रोजाना 60 हजार रुपये की बिक्री

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 11 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
यूपीः रामपुर के नवाबी ‘हब्शी हलवे’ को ओडीओसी से नई पहचान, यूपीआईटीएस में रोजाना 60 हजार रुपये की बिक्री

रामपुर का ऐतिहासिक हब्शी हलवा अब देश-विदेश में अपनी पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘एक जिला, एक व्यंजन’ यानी ओडीओसी योजना से इस पारंपरिक मिठाई को नए बाजार मिल रहे हैं। ग्रेटर नोएडा में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में कारोबारी सुहेल अख्तर खान के स्टॉल पर रोजाना करीब 60 हजार रुपये की बिक्री हुई।

इस हलवे का इतिहास नवाबी दौर से जुड़ा है। बताया जाता है कि नवाब हामिद अली खां अफ्रीका से एक कारीगर को रामपुर लाए थे, जिसने जड़ी-बूटियों, मेवे, केसर और देसी घी से यह हलवा तैयार किया। बाद में हकीम जी ने वर्ष 1930 में इसे आम लोगों के लिए बनाना शुरू किया। आज उनकी तीसरी पीढ़ी इस विरासत को आगे बढ़ा रही है।

कारीगरों के मुताबिक, 15 किलो हलवा बनाने में करीब 4 किलो देसी घी लगता है। इसे धीमी आंच पर लगभग तीन घंटे तक पकाया जाता है। कारोबारी सुहेल बताते हैं कि पहले मेलों में स्टॉल लगाने पर लाखों रुपये खर्च होते थे, लेकिन अब सरकारी प्रदर्शनियों में मुफ्त मंच मिल रहा है।

अब इस हलवे को जीआई टैग दिलाने, बेहतर पैकेजिंग और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की तैयारी है।

बाइट- सुहेल अख्तर खां, हब्शी हलवा, विक्रेता

बाइट- शानू अली, हब्शी हलवा, विक्रेता बाइट- नजर अली खां, हब्शी हलवा, कारीगर

बाइट- इमरान, क्रेता

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।