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यूपीः शाहजहांपुर में दो साधुओं की संदिग्ध मौत, झोपड़ी में आग लगने से दोनों की जलकर मौत, एक आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 6 अक्टूबर 2026 👁️ 8 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
यूपीः शाहजहांपुर में दो साधुओं की संदिग्ध मौत, झोपड़ी में आग लगने से दोनों की जलकर मौत, एक आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज

शाहजहांपुर के खुदागंज थाना क्षेत्र के सूथा गांव में दो साधुओं की झोपड़ी में आग लगने से मौत हो गई। दोनों साधु गांव से करीब एक किलोमीटर दूर स्थित भोले बाबा मंदिर परिसर में झोपड़ी बनाकर रहते थे। मृतकों की पहचान बाबा बिहारी दास और उनके चेले गोपाल दास के रूप में हुई है। ग्रामीणों के मुताबिक, सुबह झोपड़ी से धुआं उठता देखकर पुलिस को सूचना दी गई।

ग्रामीणों ने आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक दोनों साधुओं की मौत हो चुकी थी। सूचना पर अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण और बाद में पुलिस अधीक्षक सौरभ दीक्षित ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। मंदिर के संरक्षक शिवकुमार सिंह की तहरीर पर गांव के ही सुमित सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

तहरीर में आरोप लगाया गया है कि मंदिर पर कब्जा करने के इरादे से दोनों साधुओं की झोपड़ी में आग लगाई गई।पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मौके पर एफएसएल टीम ने भी जांच की है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर घटना की जांच कर रही है। पुलिस के मुताबिक, मौत का सही समय और घटना के पीछे की वजह जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी।

बाइट - सौरभ दीक्षित, एसपी

💡 पृष्ठभूमि (Background)

शाहजहांपुर के सूथा गांव में दो साधुओं की झोपड़ी में लगी आग से दोनों की मृत्यु हो गई, जिससे एक आरोपी पर मुकदमा दर्ज हुआ है। यह घटना धार्मिक समूहों की सुरक्षा और ग्रामीण इलाकों में आग सुरक्षा व्यवस्था पर प्रकाश डालती है। ऐसी दुर्घटना से ग्रामीणों में भय और असुरक्षा बढ़ सकती है, साथ ही धार्मिक अनुयायियों के बीच विश्वास पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, यह मामला स्थानीय प्रशासन और पुलिस की त्वरित कार्रवाई की क्षमता पर सवाल उठाता है, जिससे जनता को बेहतर सुरक्षा और आपातकालीन प्रबंधन की मांग बढ़ सकती है।

🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत

दोनों साधुओं की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु से हमें यह याद दिलाता है कि संघर्षों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाना चाहिए। अगर किसी भी प्रकार का मतभेद या विवाद उत्पन्न हो, तो संवाद, मध्यस्थता और कानूनी मार्ग अपनाने से अनावश्यक हानि रोकी जा सकती है। समाज में सहिष्णुता, सहानुभूति और आपसी सम्मान को बढ़ावा देकर हम ऐसी त्रासदियों को टाल सकते हैं।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।