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यूपीः सीतापुर में इको फ्रेंडली मूर्तियों की बढ़ी मांग, बघाइन गांव में परिवार के साथ प्रतिमाएं बना रहे मूर्तिकार

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 11 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
यूपीः सीतापुर में इको फ्रेंडली मूर्तियों की बढ़ी मांग, बघाइन गांव में परिवार के साथ प्रतिमाएं बना रहे मूर्तिकार

सीतापुर में शारदीय नवरात्र के लिए इको फ्रेंडली मूर्तियों की मांग बढ़ गई है। महमूदाबाद विकासखंड के बघाइन गांव में मूर्तिकार संजीत प्रजापति अपने परिवार के साथ मिट्टी की मूर्तियां तैयार कर रहे हैं। वह वर्ष 2007 से इस काम में जुटे हैं। इस बार उनके पास करीब 50 मूर्तियों के ऑर्डर हैं, जबकि पिछले साल 35 मूर्तियां बिकी थीं।

संजीत प्रजापति के मुताबिक, मूर्तियां बनाने में तालाब की मिट्टी, बांस, पुआल, सुतली, खड़िया और रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें पीओपी या किसी केमिकल का प्रयोग नहीं होता, जिससे विसर्जन के दौरान जल प्रदूषण कम करने में मदद मिलती है। परिवार के सदस्य भी मूर्ति निर्माण में सहयोग करते हैं।

मूर्तियां महमूदाबाद के आसपास के कई गांवों में भेजी जाती हैं। हालांकि, मूर्तिकारों के सामने चिकनी मिट्टी की कमी और बढ़ती लागत बड़ी समस्या है। एक ट्रॉली मिट्टी दो से ढाई हजार रुपये में मिलती है, जबकि बांस की कीमत भी बढ़ गई है। मूर्तिकारों ने सरकार से रोजगार में सहायता देने वाली योजनाएं शुरू करने की मांग की है।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।