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यूरोप को रूस से कोई खतरा नहीं, पुतिन ने पश्चिमी देशों के दावों को बताया बेबुनियाद

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 12 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
यूरोप को रूस से कोई खतरा नहीं, पुतिन ने पश्चिमी देशों के दावों को बताया बेबुनियाद

European Countries : जर्मनी के सैक्सनी-एनहाल्ट राज्य में आयोजित चुनावों में 'ऑल्टरनेटिव फॉर जर्मनी' (AfD) पार्टी को मिली बढ़त के बाद रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया है.

पुतिन का मानना है कि वर्तमान में संपूर्ण यूरोप जिस दौर और परिस्थितियों से गुजर रहा है, वह पश्चिमी ग्लोबलिस्ट्स द्वारा राजनीति, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों में लगातार की गई बुनियादी गलतियों का परिणाम है.

उन्होंने कहा कि गलतियां हर देश और समाज से होती हैं, लेकिन पश्चिम की मुख्य समस्या उनकी यह मानसिकता रही है कि वे खुद को अचूक और हर गलती से परे समझते हैं.

शीत युद्ध के बाद की मानसिकता और अहंकार पर सवाल रूस के राष्ट्रपति ने शीत युद्ध के अंत और सोवियत संघ के विघटन का उल्लेख करते हुए पश्चिमी सोच पर सीधा हमला बोला.

उन्होंने कहा कि उस ऐतिहासिक घटनाक्रम के बाद पश्चिमी ग्लोबलिस्ट्स ने खुद को दुनिया में सर्वोपरि मान लिया था.

इस अहम् की वजह से उन्हें यह भ्रम हो गया कि वे किसी भी तरह का फैसला लेने के लिए स्वतंत्र हैं और उन पर कोई नियम लागू नहीं होता.

इसी सोच के कारण वे अपनी रणनीतिक और आर्थिक गलतियों को स्वीकार करने या सुधारने के लिए कभी तैयार नहीं हुए, जिसका खामियाजा आज पूरा यूरोप भुगत रहा है.

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उन्होंने कहा कि यूरोप के साथ किसी भी प्रकार के सैन्य या राजनीतिक टकराव की कोई व्यावहारिक वजह मौजूद नहीं है.

इस तरह के दावों को बेबुनियाद बताते हुए उन्होंने यह बात दोहराई कि रूस अपने पड़ोसियों के साथ किसी अकारण संघर्ष में शामिल होने का कोई इरादा नहीं रखता है.

अंतरराष्ट्रीय समझौतों और संप्रभुता का सम्मान ऐतिहासिक संदर्भों का हवाला देते हुए पुतिन ने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध के समाप्त होने के साथ ही सभी मुख्य विवादित मुद्दों का निपटारा कर लिया गया था.

इसके बाद सोवियत संघ के विघटन के समय जो भी नए सीमाएं या व्यवस्थाएं बनीं, वे सोवियत संघ के कानूनी उत्तराधिकारी के रूप में रूसी संघ की आपसी सहमति से ही तय हुई थीं.

उन्होंने जोर देकर कहा कि इन स्थापित समझौतों के खिलाफ लिया गया कोई भी एकतरफा फैसला रूस के राष्ट्रीय हितों के खिलाफ है और यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के बुनियादी सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन करता है.

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📡 स्रोत: NewsData.io

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