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यूसीसी कानून संविधान विरोधी होने से तुरंत वापस लिया जाए: अलताफ आजाद

लेखक: Shahrukh Khan अंतिम अपडेट: 23 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
यूसीसी कानून संविधान विरोधी होने से तुरंत वापस लिया जाए: अलताफ आजाद

निमाड़ मुस्लिम जमात के सदर बोले—मध्यप्रदेश में यूसीसी लागू हुआ तो न्यायालय की शरण लेंगे

खरगोन। मध्यप्रदेश में प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर मुस्लिम समाज की ओर से विरोध के स्वर तेज होते जा रहे हैं।

विभिन्न जमातों और संगठनों द्वारा ज्ञापन एवं हस्ताक्षर अभियान के माध्यम से अपनी आपत्तियां दर्ज कराए जाने के बीच निमाड़ मुस्लिम जमात के सदर अलताफ आजाद ने प्रदेश सरकार द्वारा तैयार किए गए यूसीसी के कानूनी मसौदे पर सवाल उठाए हैं।

अलताफ आजाद ने कहा कि यदि यूसीसी का उद्देश्य समानता और समान नागरिक कानून लागू करना है, तो अनुसूचित जाति एवं जनजाति समाज को इससे अलग रखने के प्रावधान पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि ये समाज भी भारतीय संस्कृति का हिस्सा हैं।

ऐसे में उनके लिए अलग प्रावधान और मुस्लिम समाज के व्यक्तिगत कानूनों को लेकर अलग रुख अपनाने से समानता के सिद्धांत को लेकर प्रश्न खड़े होते हैं। आजाद के मुताबिक मुस्लिम समाज किसी कानून के खिलाफ नहीं है, लेकिन कानून ऐसा होना चाहिए जो संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करे।

उन्होंने कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान को देश के हर समाज ने स्वीकार किया है और संविधान नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित कानून लोगों को बांटने वाला है और इससे सामाजिक एवं जातिगत दूरियां बढ़ सकती हैं।

आजाद ने कहा कि यदि मध्यप्रदेश में यूसीसी लागू किया जाता है तो मुस्लिम समाज इसके खिलाफ न्यायालय की शरण लेगा और कानूनी लड़ाई लड़ेगा।

बेरोजगारी, पलायन और गरीबी जैसे मुद्दों से ध्यान हटाने का आरोप

अलताफ आजाद ने प्रदेश सरकार की मंशा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बेरोजगारी, पलायन और गरीबी जैसी समस्याएं गंभीर होती जा रही हैं। उनके अनुसार शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार को जवाब देना चाहिए।

आजाद ने आरोप लगाया कि जनता इन मूलभूत मुद्दों पर सरकार से सवाल न पूछे, इसलिए ध्यान भटकाने के लिए समान नागरिक संहिता का मुद्दा सामने लाया गया है। उन्होंने इसे मुसलमानों के धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों के खिलाफ बताया।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार यूसीसी के माध्यम से मुसलमानों की वक्फ संपत्तियों पर नाजायज कब्जा करना चाहती है। आजाद ने कहा कि मुस्लिम समाज ने वक्फ संशोधन बिल का बड़े स्तर पर विरोध किया है और आगे भी विरोध जारी रहेगा।

अनुच्छेद 36, 21 और 25, 26, 29 का उठाया मुद्दा

आजाद ने यूसीसी में समानता के प्रावधान को लेकर संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों का हवाला देते हुए कहा कि अनुच्छेद 36 के रास्ते से अनुसूचित जनजाति को यूसीसी से अलग रखा गया है और इसके लिए अनुच्छेद 21 में उनके अधिकारों की रक्षा का आधार बताया गया है।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यह आधार माना जा रहा है, तो फिर मुसलमानों के संदर्भ में संविधान के अनुच्छेद 25, 26 और 29 में धार्मिक एवं अल्पसंख्यक अधिकारों की रक्षा से जुड़े प्रावधानों को क्यों नहीं ध्यान में रखा गया?

अलताफ आजाद ने स्पष्ट किया कि उनकी आपत्ति कानून बनाए जाने के विचार से नहीं, बल्कि मौलिक अधिकारों की सुरक्षा से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि उनकी मांग है कि किसी भी कानून के निर्माण और क्रियान्वयन के दौरान मुसलमानों के मौलिक अधिकारों तथा धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने कहा कि यदि यूसीसी लागू किया गया तो मुस्लिम समाज कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर लड़ाई लड़ेगा तथा आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय की शरण ली जाएगी।

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Shahrukh Khan

शाहरुख खान — खरगोन संवाददाता शाहरुख खान वॉइस ऑफ क्रांति के लिए खरगोन जिले से स्थानीय और महत्वपूर्ण खबरें उपलब्ध कराते हैं। वे क्षेत्र की जनसमस्याओं, स्थानीय घटनाओं और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से कवर करते है