युवा किसान चिचिंडा की खेती से लाखों कमा रहे:मऊ में एक ही लागत में तीन फसलें उगाकर बढ़ा रहे आमदनी
मऊ जिले के भातकोल क्षेत्र के युवा किसान आमीर अहमद ने खेती को अपना पेशा बनाकर लाखों का मुनाफा कमाया है। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद उन्होंने नौकरी के बजाय खेती को रोजगार का माध्यम चुना। पिछले पांच वर्षों से वे चिचिंडा (स्नेक गॉर्ड) की खेती कर रहे हैं और अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं।
आमीर बताते हैं कि मौजूदा समय में नौकरी मिलना आसान नहीं है, इसलिए उन्होंने पढ़ाई के साथ खेती शुरू की और इसे अपना मुख्य व्यवसाय बना लिया। उनकी खेती की खासियत यह है कि वे एक ही लागत और खेत की तैयारी में तीन अलग-अलग फसलें उगाते हैं, जिनमें चिचिंडा, बोरो और लौकी शामिल हैं।
आमीर बताते हैं कि खेती की शुरुआत में तीन से चार लोगों की आवश्यकता होती है, लेकिन एक बार मेड़बंदी और मल्चिंग की लागत लगाने के बाद उसी व्यवस्था पर क्रमवार तीन फसलें तैयार की जा सकती हैं। यह तरीका लागत को काफी कम कर देता है। मई-जून में उन्होंने लगभग आठ बिस्वा खेत में चिचिंडा के बीज लगाए।
इसके लिए खेत में मेड़बंदी कर बीजों की बुवाई की गई। पौधे तैयार होने के बाद मल्चिंग विधि का उपयोग करते हुए बेलों को मल्चिंग पर चढ़ाया गया। वे पिछले लगभग एक महीने से लगातार चिचिंडा की कटाई कर रहे हैं।
आमीर के अनुसार, आठ बिस्वा में चिचिंडा की खेती पर लगभग 15 हजार रुपये की लागत आई थी, जिसे उन्होंने मात्र 10 दिनों में ही वसूल कर लिया। इसके बाद भी उन्हें लगभग एक महीने से लगातार उत्पादन मिल रहा है। उन्होंने बताया कि चिचिंडा की फसल समाप्त होने के बाद उसी मेड़बंदी पर बोरो के बीज लगाए जाएंगे।
बोरो की फसल पूरी होने के बाद इसी व्यवस्था पर लौकी की बुवाई की जाएगी। इस प्रकार, एक ही खेत की तैयारी, मेड़बंदी और मल्चिंग व्यवस्था का उपयोग कर तीन फसलें ली जाएंगी। आमीर का कहना है कि कम लागत में लगातार तीन फसलें लेने की यह तकनीक अन्य किसानों के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकती है।
उनका लक्ष्य खेती को आधुनिक तकनीकों से जोड़कर कम लागत में अधिक उत्पादन और बेहतर मुनाफा हासिल करना है।
📡 स्रोत: NewsData.io