व्यापार

युवाओं के हाथ में है भारत की बेरोजगारी का हल: स्वरोजगार और कौशल विकास ही रास्ता!

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 26 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति

भारत दुनिया का सबसे युवा राष्ट्र है, जहाँ जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा 15-29 वर्ष के आयुवर्ग का है। सरकारी आँकड़े बताते हैं कि देश में बेरोजगारी दर 2023 में 7.8% तक पहुँच चुकी है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में यह आँकड़ा और भी अधिक है।

युवाओं के लिए रोजगार के पर्याप्त अवसर न होने के कारण न केवल आर्थिक असमानता बढ़ रही है, बल्कि सामाजिक अशांति की संभावनाएँ भी उत्पन्न हो रही हैं। ऐसे में, स्वरोजगार, कौशल विकास और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देना ही एकमात्र रास्ता है जो देश की युवा शक्ति को सही दिशा दे सकता है।

सरकार द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न अभियानों जैसे 'स्किल इंडिया', 'प्रधानमंत्री मुद्रा योजना' और 'स्टार्टअप इंडिया' ने इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाए हैं, मगर अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।

भारत में बेरोजगारी की समस्या एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है, जिसका सीधा असर युवाओं की मानसिकता और देश के आर्थिक विकास पर पड़ रहा है। राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन (NSSO) के अनुसार, 2022-23 में देश में बेरोजगारी दर जहाँ शहरी क्षेत्रों में 8.2% थी, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में यह आँकड़ा 7.2% रहा।

लगभग 2 करोड़ युवा हर साल रोजगार बाज़ार में प्रवेश कर रहे हैं, मगर उद्योगों द्वारा पैदा किए जा रहे रोजगार के अवसर इससे काफी कम हैं। शहरी क्षेत्रों में तो स्थिति और भी चिंताजनक है, जहाँ शिक्षित युवाओं में बेरोजगारी दर 15-20% तक पहुँच चुकी है।

शिक्षा प्रणाली और उद्योग जगत के बीच सामंजस्य की कमी के कारण कौशलयुक्त कर्मचारियों की कमी भी एक बड़ी समस्या बन गई है। इसके अलावा, महामारी और तकनीकी बदलावों ने रोजगार बाज़ार को और अधिक प्रतिस्पर्धी बना दिया है। बेरोजगारी की इस समस्या के पीछे कई कारण हैं, जिनमें शिक्षा प्रणाली में व्यावहारिक कौशल की कमी प्रमुख है।

भारतीय शिक्षा प्रणाली अभी भी सैद्धांतिक ज्ञान पर अधिक ध्यान देती है, जबकि उद्योगों को तकनीकी और व्यवहारिक कौशल की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, औद्योगिक विकास की धीमी गति और छोटे एवं मध्यम उद्यमों (SME) की कम संख्या भी रोजगार के अवसरों को सीमित करती है।

सरकार द्वारा चलाए जा रहे रोजगार सृजन कार्यक्रमों में भी कई कमियाँ हैं, जैसे नौकरियों के लिए अपर्याप्त प्रशिक्षण, वित्तीय संसाधनों की कमी और अनुपयुक्त नीतियाँ।

तकनीकी क्रांति के दौर में जहाँ AI और ऑटोमेशन रोजगार के अवसरों को कम कर रहे हैं, वहीं नए क्षेत्रों जैसे डेटा साइंस, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल मार्केटिंग में कौशल की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में, युवाओं को पारंपरिक नौकरियों के बजाय स्व-रोजगार और स्टार्टअप्स की ओर आकर्षित किया जाना चाहिए।

बेरोजगारी की चुनौती से निपटने के लिए सरकार, उद्योग जगत और युवाओं को मिलकर काम करना होगा। सबसे पहले, शिक्षा प्रणाली में सुधार लाकर व्यावहारिक कौशल और तकनीकी ज्ञान पर जोर दिया जाना चाहिए। कौशल विकास कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाया जाना चाहिए, जिसमें उद्योग जगत की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाए।

स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए सरकार को उद्यमियों को वित्तीय सहायता, मार्गदर्शन और बाज़ार तक पहुँच प्रदान करनी चाहिए। इसके अलावा, उद्योग जगत को भी अपनी जिम्मेदारी समझते हुए युवाओं को प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने चाहिए।

अंततः, युवाओं को स्वयं भी अपने कौशल को बढ़ावा देने और नवाचार की ओर बढ़ने के लिए तैयार रहना होगा। तभी भारत अपने जनसांख्यिकीय लाभांश का सही उपयोग कर सकता है और बेरोजगारी की समस्या से मुक्ति पा सकता है। भारत में बेरोजगारी दर के आँकड़े कहाँ देखे जा सकते हैं?

भारत में बेरोजगारी दर के आँकड़े राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन (NSSO), भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI), और सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) जैसे संगठनों द्वारा प्रकाशित किए जाते हैं। सरकारी वेबसाइट्स जैसे 'डेटा.gov.in' और 'पीएलआई (PLFS)' रिपोर्ट्स भी विश्वसनीय आँकड़े उपलब्ध कराती हैं।

कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से बेरोजगारी को कैसे कम किया जा सकता है? कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुसार प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।

सरकार द्वारा चलाए जा रहे 'स्किल इंडिया' जैसे अभियानों को और अधिक व्यापक बनाया जाना चाहिए, जिसमें निजी क्षेत्र की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा, ऑनलाइन प्लेटफार्म्स जैसे 'स्वयं', 'कौरसेरा' और 'उडेमी' का उपयोग कर युवाओं को घर बैठे कौशल सीखने के अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं।

M
Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।