युवाओं द्वारा कुल्लू के गाँव मनयाशी, देवरी और सराहन में बच्चों और ग्रामीणों के साथ पर्यावरण संरक्षण व वेस्ट मैनेजमेंट पर संवाद
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सितंबर 30, कुल्लू (हिमाचल प्रदेश): युवाओं का एक समूह द्वारा हिमालय क्षेत्र में एक अलग ही ट्रेंड शुरू करने का प्रयास कर किया जा रहा है। यह युवा गांवों को पैसों से नहीं, बल्कि अपनी सोच, समय, हुनर और काम करने की क्षमता से अपनाने की पहल कर रहे हैं। यहां ‘गांव को अपनाने’ का अर्थ आर्थिक जिम्मेदारी लेना नहीं, बल्कि उस जगह के साथ एक ऐसा रिश्ता बनाना है जिसमें युवा अपनी क्षमता के अनुसार लगातार योगदान दे सकें।
चंडीगढ़ के निखिल शर्मा की अगुवाई में शुरू हुई यह पहल देश के अलग-अलग हिस्सों से युवाओं को हिमालयी समुदायों से जोड़ रही है। इसका उद्देश्य सिर्फ पहाड़ों की सैर करना नहीं, बल्कि वहां के लोगों के बीच जाकर उनकी चुनौतियों को समझना और अपनी क्षमताओं के जरिए पर्यावरण एवं समुदाय से जुड़े प्रयासों में योगदान देना है।
इसी कड़ी में सैंज घाटी के मनयाशी, देवरी और सराहन गांवों में युवाओं ने स्कूली विद्यार्थियों और ग्रामीणों के साथ मिलकर पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार पर्यटन को लेकर पहल की। स्कूलों में युवाओं ने विद्यार्थियों के साथ प्लास्टिक कचरे, उसके पर्यावरण पर असर और वेस्ट मैनेजमेंट पर संवाद किया।
खेलों और इंटरैक्टिव गतिविधियों के जरिए बच्चों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ा गया, वहीं ड्राइंग और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से छोटे बच्चों को स्वच्छ गांव और प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाने की कोशिश की गई।